लखनऊ: में आयोजित 1423वीं श्रीराम कथा के पहले दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने राष्ट्र, संस्कृति और सनातन परंपरा को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में शुरू हुई श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व तनाव, संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, लेकिन भगवान की कृपा और भारतीय संस्कृति की शक्ति के कारण भारत सुरक्षित, सशक्त और विश्व के लिए आशा का केंद्र बना हुआ है।
कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्पष्ट कहा कि भारत को राममय बनाना उनका संकल्प है। उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक आराध्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। रामभद्राचार्य ने पंचवटी प्रसंग का वर्णन करते हुए लक्ष्मण और भगवान राम के संवाद की व्याख्या की तथा नवधा भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रवण, कीर्तन, स्मरण और पादसेवन सहित भक्ति के नौ स्वरूप व्यक्ति को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
उन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण को भारतीय आस्था और सांस्कृतिक चेतना की ऐतिहासिक विजय बताते हुए कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान है। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि आगामी 14 जनवरी से गुरुकुलम् की स्थापना की जाएगी, जहां भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और सनातन मूल्यों के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दिया जाएगा।
कथा से पहले भव्य कलश और पोथी यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर विधायक डॉ. नीरज बोरा ने सपरिवार गुरुपाद पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रामभद्राचार्य ने समाज से सजग रहने, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संगठित होने तथा राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान भी किया।
